अभी हाल ही की कुछ दिनों में डॉ एस जयशंकर जो कि भारत के विदेश मंत्री हैं उनके हाल ही के कुछ बयान जो कि कुछ विदेशी मंच पर दिए गए चर्चा के विषय बने हुए हैं।
डॉ एस जयशंकर के इन्हीं बयानों को भारत के साथ-साथ भारत के दुश्मन देश पाकिस्तान से भी सराहना मिल रही है ऐसे में आज हम इस बारे में बात करते हैं आजादी के बाद से लेकर आज तक भारत की विदेश नीति कांग्रेस तथा बीजेपी के राज में कैसी रही है ?
तो फिर बात करें सन 1947 से लेकर आज साल 2022 तक कि भारत की भारत आज कई मायनों में कई देशों से काफी आगे निकल चुका है चाहे वह अर्थव्यवस्था हो , सैन्य ताकत हो या फिर दूसरे देशों से व्यापारिक संबंध हो। आज पूरी दुनिया में भारत की हर बात को ध्यान से सुना जाता है। किसी भी देश के बढ़ते कद का कहीं ना कहीं उसकी विदेश नीति से सीधा संबंध होता है।
आज भारत का करीब 201 देशों के साथ डिप्लोमेटिक वेस्ट हैं वही 21 देशों के साथ सामरिक संबंध है। लेकिन आजादी के कुछ साल बाद तक भारत की विदेश नीति सिर्फ 4 देशों तक ही सीमित रहती थी और वह देश थे पाकिस्तान चीन रूस और अमेरिका। लेकिन आज आपको भारत की मौजूदगी अमेरिका , रूस , मिडिल , ईस्ट , देश , यूरोप , फ्रांस , यूके इत्यादि देशों में देखने को मिलेगी।
तो भारत की विदेश नीति को हम चार भागों में बांटते हैं –
1. नेहरू काल में भारतीय विदेश नीति – जवाहरलाल नेहरू भारत के पहले तथा कार्यकाल के हिसाब से अब तक के सबसे लंबे समय तक के प्रधानमंत्री हैं। जवाहरलाल नेहरू जब देश के प्रधानमंत्री बने तब विदेश नीति वे खुद ही देखते थे , तथा किसी और का भारतीय विदेश नीति में दखल पसंद नहीं करते थे।
तू नेहरू के कार्यकाल में भारत की विदेश नीति नेहरू के अनुसार आदर्शवाद पर निर्धारित थी। आदर्शवाद का मतलब है नियम , कायदे कानून , लोकतंत्र तथा युद्ध नहीं करना, ज्यादा से ज्यादा मुद्दों को बातचीत से समझाना और किसी के पक्ष में नहीं जा सकता।
तो उस समय नेहरू के बारे में भारत की विदेश नीति कई मामलों में काफी अच्छी रही खासकर की किसी भी देश की तरफ नहीं जाने वाली , तथा स्वतंत्र विचार रखने वाली । यह विदेश नीति भारत को आज तक फायदा पहुंचा रही है। लेकिन कई मामलों में नेहरू जी की यह विदेश नीति भारत को बैकफायर भी कर गई।
ऐसा इसलिए क्योंकि वह नेहरू ही थे कश्मीर का मुद्दा यूएन लेकर गए। उन्हें ऐसा लगता था कि कश्मीर का मामला इंटरनेशनल लॉ से सुलझाया जा सकता है लेकिन ऐसा नहीं हुआ और कश्मीर मुद्दा आज की बना हुआ है। उनकी विदेश नीति मैं दूसरी सबसे बड़ी गलती तब हुई जब सन 1949 में चीन की कम्युनिस्ट पार्टी द्वारा चीन पर कब्जा करने के बाद नेहरू ने तुरंत चीन को मान्यता प्रदान कर दी थी जबकि कई विदेशी देशों ने ऐसा नहीं किया था लेकिन शायद नेहरू को वर्ल्ड लीडर बनना था।
इन सबके अलावा जब चीन में 1954 में तिब्बत को कब्जा किया तब भी नेहरू ने चीन का समर्थन किया। 1954 में ही पंचशील समझौते पर हस्ताक्षर किए जो 1962 में भारत चीन युद्ध के रूप में उल्टे पड़ गए। इन सबके अलावा चीन के लिए यूएनएससी में स्थाई सदस्य की सीट छोड़ दी जो कि आज तक भारत को भारी पड़ रही है । चीन हर समय भारत के विरुद्ध वीटो कर देता है।
तो कुल मिलाकर नेहरू के कार्यकाल में भारतीय विदेश नीति काफी डिफेंसिव रही इसका नतीजा यह रहा भारत 1962 का युद्ध हारा और अक्साई चीन के रूप में एक बड़ा हिस्सा चीन के कब्जे में चला गया।
जवाहरलाल नेहरु की मृत्यु के बाद भारत की कमान संभाली लाल बहादुर शास्त्री जी ने लेकिन वह भी ज्यादा समय तक जीवित नहीं रह सके और फिर भारत की अगली प्रधानमंत्री बनी श्रीमती इंदिरा गांधी जी – आयरन लेडी ऑफ इंडिया।
2. इंदिरा गांधी के कार्यकाल में भारतीय विदेश नीति – इंदिरा गांधी के प्रधानमंत्री बनते ही भारत की विदेश नीति आक्रामक तथा भारत के फायदे के लिए कुछ भी करने वाली हो गई । इंदिरा गांधी जी का सिर्फ एक ही नजरिया था कि भारत को ताकतवर देश बनाना है तथा सिर्फ राष्ट्रीय हित में काम करना।
इंदिरा गांधी जी के लिए भारत ही सबसे अहम था तथा वह एक राष्ट्रीय नेता के रूप में स्थापित प्रधानमंत्री थी। इसीलिए आप सब ने इस बात पर गौर किया होगा कि बीजेपी के नेता कांग्रेस के कई भूतपूर्व मंत्री तथा प्रधानमंत्रियों पर टिप्पणी करते हैं लेकिन इंदिरा गांधी के बारे में कुछ भी नहीं कहते। ऐसा इसलिए क्योंकि उन्होंने अपने कार्यकाल में राष्ट्रीय हित में कई मजबूत निर्णय लिए।
इनमें से प्रमुख निर्णय थे साल 1967 की चीन तथा भारत की जंग जिसमें भारत जीता था। उसी के कुछ सालों बाद साल 1971 में पाकिस्तान के पूर्वी भाग को पाकिस्तान से अलग किया और बांग्लादेश बनाया । फिर साल 1974 में परमाणु परीक्षण किया। खाली स्थान को जड़ से खत्म करने के लिए ऑपरेशन ब्लू स्टार चलाया भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा को देखते हुए रिसर्च एंड एनालिसिस विंग या रॉ की स्थापना की।
लेकिन ज्यादा आक्रामक नीति के चलते इंदिरा गांधी जी के कई निर्णय गलत भी साबित हुए जैसे कि साल 1975 में इंदिरा गांधी जी ने देश में इमरजेंसी लगाई। कई देशों ने इस पर भारत पर दबाव बनाने की कोशिश की लेकिन इंदिरा गांधी पर कोई फर्क नहीं पड़ा इनके अलावा भारत में सब कुछ अपने हाथ में लेने के लिए नेशनललिस्ट पॉलिसी अपनाई।
इंदिरा गांधी जी के निधन के बाद भी भारत की विदेश नीति हाथ आक्रामक ही रही। साल 1987 में चीन के साथ अरुणाचल प्रदेश में भारत की झड़प हुई जैसे कि भारत में चीन के साथ बैठकर सुलझा लिया। इसके बाद भारत ने श्रीलंका में उसकी मदद के लिए सेना भेजी।
यह भी आक्रामक नीति का ही उदाहरण था। तो कुल मिलाकर साल 1964 से लेकर साल 1991 तक भारत की नीति आक्रामक ही रही।
3. साल 1992 से 2014 तक की भारतीय विदेश नीति – साल 1990 में जहां सोवियत यूनियन टूट गया था वहीं भारत भी एक आर्थिक संकट से गुजर रहा था। तो इस समय भारत की विदेश नीति में कई तरह के बदलाव देखने को मिले। भारत के नेता उस समय भारत की आर्थिक स्थिति सुधारने पर ज्यादा ध्यान देने लगे।
इस समय भारत में कई देशों के साथ अपने रिश्तो को सुधारने पर ध्यान दिया और कई देशों से व्यापारिक समझौते किए। 1991 के बाद भारत में बहुत वियतनाम सिंगापुर जापान साउथ कोरिया वियतनाम सिंगापुर और आसियान देशों के साथ रिलेशन को * के वही वेस्टर्न कंट्री जैसे कि यूनाइटेड स्टेट यूनाइटेड किंग्डम Germany relationship
भारत की फॉरेन पॉलिसी डिफेंस परी को आर्मी को सुधारने के चक्कर में भारत की फॉरेन पॉलिसी डिफेंसिव हो गई थी जिसके चलते कश्मीरी पंडितों का जनोसाइड और एक्सीडेंट देखने को मिला भारत सरकार ने उनके लिए कुछ नहीं किया 1999 में जब अटल जी ए तो भारत की फॉरेन पॉलिसी थोड़ी बहुत एग्रेसिव हो गई थी भारत ने न्यूक्लियर टेस्ट किया था कारगिल वॉर में पाकिस्तान को धूल चटाई थी पर अटल जी का 5 साल का था अटल जी के जाने के बाद अटल जी के जाने के बाद भारत की फॉरेन पॉलिसी फिर से डिफेंसिव हो गई थी पाकिस्तान भारत बैठक करवाते जा रहा था और भारत कुछ नहीं कर रहा था इसके अलावा भारत की फॉरेन पॉलिसी इतनी ज्यादा डिफेंसिव हो गई थी ऐसा लग रहा था कि नेहरू जी का वापस आ गया भारत में चाइना बॉर्डर पर सक्षम को रोक दिया था पता नहीं उस समय कांग्रेस के लिए मिल कर आए थे उसके बाद भारत ने अपना मार्केट चाइना के लिए खोल दिया मनमोहन सिंह जी के टाइम में ही भारत और चाइना का शुरू हुआ था इसके अलावा श्रीलंका में अपना मोहन सिंह जी दिल्ली की फॉरेन पॉलिसी गायकी 2004 से 2014 के बीच भारत की फॉरेन पॉलिसी ज्यादा बेकार और डिफेंसिव हो गई थी कि भारत को सब देश हल्के में लेने लगे थे।
जहां 10 साल 2004 से 2014 के बीच भारत की फॉरेन पॉलिसी बर्बाद थी वहीं 2014 के बाद भारत के फॉरेन पॉलिसी के गोल्डन डे शुरू हुए अब तक आप लोगों ने 19 में क्या उसमें आवाज सुना होगा पर अगर आप भारत की फॉरेन पॉलिसी ध्यान से देखोगे तो भारत की फॉरेन पॉलिसी 2014 के बाद आत्मनिर्भर हो गई है आज भारत के संबंध यूएस के साथ भी अच्छे है रूस भारत के रिलेशन इजरायल के साथ भी अच्छे मिडल ईस्ट कंट्रीज के साथ भी अच्छे हैं भारत के रिलेशन साउथ कोरिया के साथ भी अच्छे जापान के साथ भी अच्छे यूरोपियन यूनियन के साथ भी अच्छे अफ्रीकन यूनियन और आसियान कंट्रीज के साथ भारत के रिलेशन अच्छे है। भारत एक तरफ जहां पुलिस का पाठ है तो दूसरी तरफ कोट का b.a. पार्ट है बस गिने-चुने कुछ देश है जिनके साथ भारत के रिलेशन अच्छे नहीं है और वह देश पाकिस्तान चाइना और टर्की 2014 से जब से बीजेपी सत्ता में आई है तब से भारत फॉरेन पॉलिसी यूएसयू वेस्टर्न कंट्रीज को लेकर चेंज हुई है पहले भारत इन देशों की से सुनता था पर अब भारत इन ए सुनाता है दशक में वेस्टर्न कंट्रीज भारत के खिलाफ एक्शन लेने को समीप में वेस्टर्न कंट्रीज भारत और एशिया के खिलाफ एक्शन लेने को बोल रही है पर भारत अपने फॉरेन पॉलिसी में खड़ा हुआ कुछ नहीं बोल रहे भारत और एशिया के खिलाफ कुछ नहीं बोल रहा है और यह चीज वेस्टर्न कंट्री स कैटेगरी है इसके अलावा वेस्टर्न कंट्रीज के द्वारा लगाए जा रहे तमाम इसके अलावा वेस्टर्न कंट्रीज के द्वारा लगाए जा रहे तमाम प्रसिद्ध के बावजूद भारत वैश्य से बड़ी मात्रा में तेल खरीद रहे और यह चीज को करिए
भारत के फॉरेन मिनिस्टर जय शंकर जी ने साफ-साफ कह दिया है कि भारत ना राज्य के साथ ने यूक्रेन के साथ है भारत से अपना फायदा देख रहे हैं इसके अलावा जब से मोदी सरकार पाकिस्तान को लेकर पाकिस्तान भारत की फॉरेन पॉलिसी चेंज हुई है अगर पाकिस्तान भारत बैठक करवाता है तो भारत लड़ाई करता है आर्टिकल 370 को हटाकर भारत के सॉन्ग फॉरेन पॉलिसी का एग्जांपल आफ आर्टिकल 370 कश्मीर आर्टिकल 370 हटाया था तब कोई भी बड़ा देश भारत के अगेंस्ट कोचिंग बोला पाकिस्तान हर प्लेटफार्म पर चिपका पर हर जगह उसे मुंह की खानी पड़ेगी इसके अलावा भारत अपनी फॉरेन पॉलिसी के नाम पर दुनिया में पाकिस्तान को आइसोलेट कर रहे हैं इस समय पाकिस्तान आइसोलेटेड है उसमें सबसे बड़ा हाथ भारत का है भारत में अपनी डिप्लोमेसी और सॉफ्ट बाबा के नाम से पाकिस्तान को ग्लोबल आइसोलेट करके रखा है इसके अलावा जब से मोदी सरकार आई है तब से भारत की फॉरेन पॉलिसी चीन को लेकर भी चेंज हुई है भारत सेना के अज्ञात डिफेंसिव पॉलिसी को त्याग चुका है और धीरे-धीरे चाइना के गैस एग्रेसिव पॉलिसी अपनाता जा रहा है भारत बहुत तेजी से इंडिया चाइना बॉर्डर रोड का करेक्शन कर रहा है भारत पाकिस्तान और चाइना को लेकर चाणक्य नीति अपना रखी अगर आपका पड़ोसी देश का दुश्मन है उसके पड़ोसी देश को अपना दोस्त बना लो भारत पाकिस्तान भारत पाकिस्तान के पड़ोसी देश अफगानिस्तान और ईरान से अच्छे रिलेशन बनाकर रखा हुआ है अफगानिस्तान को लेकर भारत की फॉरेन पॉलिसी बदली नहीं है जब तालिबान ने अफगानिस्तान पर कब्जा किया था पाकिस्तान कह रहा था कि भारत की इन्वेस्टमेंट अफगानिस्तान में डूब गई है पर हुआ इसका उल्टा ही तालिबान ने कह दिया कि हमारी भारत से कोई दुश्मनी नहीं है और तालिबान को 1 साल हो चुके हैं और भारत के मैच में अफगानिस्तान में अभी भी प्रोटेक्टेड है इसके अलावा भारत अफगानिस्तान को फाइनेंशियल मदद भी कर रहा है। अनाज पहुंचा रहे भारत अपनी सॉफ्ट पावर अफगानिस्तान में बढ़ाई जा रहा है इसी तरह भारत के रिलेशन चाइना के साथ दक्षिणी है तो भारत के पड़ोसी देश साउथ कोरिया जापान आसियान देश श्रीलंका भूटान नेपाल के रिलेशन में
भूटान में भारत 4 हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर स्टेशन और डैम बना रहा है नेपाल में अब तक का सबसे बड़ा डैम भारत बना रहा है इसके अलावा भारत श्रीलंका की हर लेवल पर मदद करें और अभी भारत के मना करने के बावजूद चाइनीस एवं अटूटा पोर्ट में लैंड हुई है तो इस चीज को भी भारत बहुत क्लोज ही मॉनिटर कर रहा है और इसका तोड़ वीर भारत जल्दी निकालेगा इसके अलावा चारों को कॉल करने के लिए भारत ग्रुप का भी बन गया तो यह सब देखकर साफ नजर आ रहा है कि भारत की फॉरेन पॉलिसी आत्मनिर्भर हो गई है और यह बात तो आप हमारे दुश्मन देश भी बोल रहे हैं देखो इस समय भारत की फॉरेन पॉलिसी इतनी ज्यादा इंडिपेंडेंट हो गई है जितनी पहले कभी भी नहीं होगा उतनी ही भारत की फॉरेन पॉलिसी और ज्यादा स्ट्रांग होगी तो आपको क्या लगता है कि फॉरेन पॉलिसी सबसे ज्यादा अच्छी थी इस समय खराब थी?
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★ जय हिंद ★

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